5.47.19
ततः कपिः तम् रण चण्ड विक्रमम् | विवृद्ध तेजो बल वीर्य सायकम् | कुमारम् अक्षम् प्रसमीक्ष्य सम्युगे | ननाद हर्षात् घन तुल्य विक्रमः