4.30.33
नभः समीक्ष्या अंबु धरैः विमुक्तम् विमुक्त बर्ह आभरणा वनेषु | प्रियासु अरक्ता विनिवृत्त शोभा गत उत्सवा ध्यान परा मयूराः