4.23.26दीर्घ आयुर् भव पुत्र इति किम् अर्थम् न अभिभाषसे | अहम् पुत्र सहाया त्वाम् उपासे गत चेतनम् | सिंहेन पातितम् सद्यो गौः स वत्सा इव गो वृषम्