5.7.16ततः स ताम् कपिर् अभिपत्य पूजिताम् | चरन् पुरीम् दश मुख बाहु पालिताम् | अदृश्य ताम् जनक सुताम् सुपूजिताम् | सुदुह्खिताम् पति गुण वेग निर्जिताम्