6.62.4स तत्तदा सूर्य इवाभ्रजालम् | प्रविश्य रक्षोधिपतेर्निवेशनम् | ददर्श दूरेऽग्रजमासनस्थम् | स्वयंभुवम् शक्र इवासनस्थम्