4.30.46रात्रिः शशांक उदित सौम्य वक्त्रा तारा गण उन्मीलित चारु नेत्रा | ज्योत्स्ना अंशुक प्रावरणा विभाति नारी इव शुक्ल अंशुक संवृत अंगी