6.74.58शोभितं विविधैर्वृक्तैरगमत्पर्वतोत्तमम् | स तम् समासाद्य महानगेन्द्रम् | मतिप्रवृद्धोत्तमघोरशृङ्गम् | ददर्श पुण्यानि महाश्रमाणि | सुरर्षिसङ्घोत्तमसेवितानि