6.59.19यश् च एष शूलम् निशितम् प्रगृह्य | विद्युत् प्रभम् किम्कर वज्र वेगम् | वृष इन्द्रम् आस्थाय गिरि प्रकाशम् | आयाति सो असौ त्रिशिरा यशस्वी