2.76.23
कृत उदकम् ते भरतेन सार्धम् | नृप अन्गना मन्त्रि पुरोहिताः च | पुरम् प्रविश्य अश्रु परीत नेत्रा | भूमौ दश अहम् व्यनयन्त दुह्खम्