2.12.112
क्षुरोपमाम् नित्यमसत्प्रियम्वदाम् | प्रदुष्टभावाम् स्वकुलोपघातिनीम् | न जीवितुम् त्वाम् विषहेऽमनोरमाम् | दिधक्षमाणाम् हृदयम् सबन्धनम्