6.59.108
स ताम् विधूम अनल सम्निकाशाम् | वित्रासनीम् वानर वाहिनीनाम् | चिक्षेप शक्तिम् तरसा ज्वलन्तीम् | सौमित्रये राक्षस राष्ट्र नाथह्