स ताम् विधूम अनल सम्निकाशाम् । वित्रासनीम् वानर वाहिनीनाम् । चिक्षेप शक्तिम् तरसा ज्वलन्तीम् । सौमित्रये राक्षस राष्ट्र नाथह् ॥१०८॥
6.59.108 #ca528428d94a
स ताम् विधूम अनल सम्निकाशाम् । वित्रासनीम् वानर वाहिनीनाम् । चिक्षेप शक्तिम् तरसा ज्वलन्तीम् । सौमित्रये राक्षस राष्ट्र नाथह् ॥१०८॥
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